Thursday, 12 September 2019

बस यही गाऊँ

मुल्क से ज़्यादा मैं किसे क्या चाहूँ
लब खुलें जब भी बस मैं यही गाऊँ

के जो अपना निशान-ओ-लहू बहाते हैं
वे जो जिस्मों को अपने यूँ ही तपाते हैं

वे जो सरहद पर हरपल एक कहानी हैं
किसने ये उनकी ताकत न पहचानी है

वे जो रोके हैं गोली को अपने सीने से
वो वंचित हैं बहनों की राखी-रोली से

उनको मैं नत्मस्तक हो प्रणाम करता हूँ
उनके चरणों मे मैं ये पैगाम रखता हूँ

के न कुर्बानी तुम्हारी यूँही जाया होगी
अगली पीढ़ी से तुम्हारी यादें ताज़ा होंगी

मैं तो हर पल बस यही दोहराऊं
मुल्क से ज़्यादा मैं किसे क्या चाहूँ

होती होगी तकलीफ उन माताओं को
खलती होगी कमियां भी उनके गांवों को

लहलहाती फसलों और ठंडी छांव को

थोड़ी यादें उनको भी तो झटकाती होंगी
घर की यादें उनको भी तो आती होंगी

फिर भी चलते हैं वो सीने में एक चिंगार लिए
कंधों पर अपने देश की सुरक्षा का भार लिए

लब खुलें जब भी मैं बस यही गाऊँ
मुल्क से ज़्यादा मैं किसे क्या चाहूँ।

Wednesday, 27 February 2019

जन नायक

आतंकियों के भारत माँ पर
घातक अनेक प्रहार हुए ,
कल तक सत्ता के थे
मौन सभी दरबार रहे,
आज मिला है शेर हमें ,
जो सीधे प्रतिकार करे,
हमलावर के घर में घुसकर
जड़ से ही संहार कर।।

आओ मिलकर विजय करे
इस भारत माँ के सेवक को
अपना कल सौंपे उसको ,
जो आज जगा है रातों को।।

हाँ हाँ समझे बिल्कुल ठीक तुम,
मैं बात कर रहा हूँ मोदी की,
सक्षम बनाया भारत को ,
और खोली पाक की धोती भी।।

एक बार फिर पूरा भारत
एक गूंज में हुंकार भरे,
एक सूत्र में बंधे देश
फिर मोदी का आह्वान करे।

वचन दिया था उसने कि
वो देश नही रुकने देगा
वचन दिया था उसने कि
वो देश नहीं झुकने देगा,
वचन दिया था उसने कि
वो देश नही मिटने देगा,

वचन किया है पूर्ण आज मेरे
इस भारत भू के नायक ने,
नहीं तोड़ा विश्वास हमारा,
उस जन ,गन, मन के नायक ने।।

मैं शब्दों की धारा से उसे
आज सलामी देता हूँ,
इन कलम पंक्तियों से मैं उनको
जन मन की वाणी देता हूँ।।।

                                                धन्यवाद
                                             "तरुण त्यागी"