Tuesday, 14 April 2020
देश के जयचन्द
Monday, 30 March 2020
क्यों नही सीखते इतिहास से
Sunday, 22 March 2020
माँ का आँचल
कैसी अजब है ये बात कि संताने समझने लगती हैं ,
बुजुर्गो को खुद पर बोझ।
एक बात समझलो ऐ नादानों,
इस जीवन में हो तुम उनके आलोक।
बुलंदियों को छूने की चाह मन में आई थी,
साथ दिया उस माता ने जो आज तुझे न
भाई थी।
जब काल तेरा आएगा ,
न रोएगी दुनिया तुझ पर।
वही माँ फिर भी तुझे,
अपने आँचल में सुलयेगी।।
धन्यवाद (तरुण त्यागी)
Thursday, 12 September 2019
बस यही गाऊँ
मुल्क से ज़्यादा मैं किसे क्या चाहूँ
लब खुलें जब भी बस मैं यही गाऊँ
के जो अपना निशान-ओ-लहू बहाते हैं
वे जो जिस्मों को अपने यूँ ही तपाते हैं
वे जो सरहद पर हरपल एक कहानी हैं
किसने ये उनकी ताकत न पहचानी है
वे जो रोके हैं गोली को अपने सीने से
वो वंचित हैं बहनों की राखी-रोली से
उनको मैं नत्मस्तक हो प्रणाम करता हूँ
उनके चरणों मे मैं ये पैगाम रखता हूँ
के न कुर्बानी तुम्हारी यूँही जाया होगी
अगली पीढ़ी से तुम्हारी यादें ताज़ा होंगी
मैं तो हर पल बस यही दोहराऊं
मुल्क से ज़्यादा मैं किसे क्या चाहूँ
होती होगी तकलीफ उन माताओं को
खलती होगी कमियां भी उनके गांवों को
लहलहाती फसलों और ठंडी छांव को
थोड़ी यादें उनको भी तो झटकाती होंगी
घर की यादें उनको भी तो आती होंगी
फिर भी चलते हैं वो सीने में एक चिंगार लिए
कंधों पर अपने देश की सुरक्षा का भार लिए
लब खुलें जब भी मैं बस यही गाऊँ
मुल्क से ज़्यादा मैं किसे क्या चाहूँ।
Wednesday, 27 February 2019
जन नायक
आतंकियों के भारत माँ पर
घातक अनेक प्रहार हुए ,
कल तक सत्ता के थे
मौन सभी दरबार रहे,
आज मिला है शेर हमें ,
जो सीधे प्रतिकार करे,
हमलावर के घर में घुसकर
जड़ से ही संहार कर।।
आओ मिलकर विजय करे
इस भारत माँ के सेवक को
अपना कल सौंपे उसको ,
जो आज जगा है रातों को।।
हाँ हाँ समझे बिल्कुल ठीक तुम,
मैं बात कर रहा हूँ मोदी की,
सक्षम बनाया भारत को ,
और खोली पाक की धोती भी।।
एक बार फिर पूरा भारत
एक गूंज में हुंकार भरे,
एक सूत्र में बंधे देश
फिर मोदी का आह्वान करे।
वचन दिया था उसने कि
वो देश नही रुकने देगा
वचन दिया था उसने कि
वो देश नहीं झुकने देगा,
वचन दिया था उसने कि
वो देश नही मिटने देगा,
वचन किया है पूर्ण आज मेरे
इस भारत भू के नायक ने,
नहीं तोड़ा विश्वास हमारा,
उस जन ,गन, मन के नायक ने।।
मैं शब्दों की धारा से उसे
आज सलामी देता हूँ,
इन कलम पंक्तियों से मैं उनको
जन मन की वाणी देता हूँ।।।
धन्यवाद
"तरुण त्यागी"
Thursday, 15 November 2018
हुंकार
हुंकार रहा है भूतल पर
हुंकार रहा है जल में भी
हुंकार रहा हर दिशा क्षितिज में
हुंकार रहा है नभ में भी
खोई गरिमा पाने को
सबसे सक्षम बन जाने को
तप कर सोना बन जाने को
सोने की चिड़िया कहलाने को
फिर विश्वगुरु बन जाने को
सबसे महान कहलाने को
दिन रात तपाया खुद को है
दिन रात जलाया खुद को है
महनत से सींचा हर जन ने
दिन रात चलाया खुद को है
अर्थव्यवस्था में इसकी
सबसे ऊंची छलांग पड़ी
सैन्य और शौर्य में इसने
सीखने वालों की प्यास भरी
और बात करें तकनीकी तो
नभ में सफल हुंकार भरी
विकास और कौशल में इसने
शेरों जैसी दहाड़ भरी
और संयुक्तता सिखलाने को
स्टेच्यू ऑफ यूनिटी की नींव धरी
हुंकार रहा है भूतल पर
हुंकार रहा है जल में भी
हुंकार रहा हर दिशा क्षितिज में
हुंकार रहा है नभ में भी।।
धन्यवाद
"तरुण त्यागी"
Saturday, 21 July 2018
फरियाद
कुछ अलग अंदाज था
जो वक्त की न की कदर
आज बैठा हूँ अकेले
खाये ठोकर इस कदर
सर पकड़कर रो तड़पकर
बैठा हूँ मैं अब इसकदर
जैसे मांझी को न आये
साहिल-ऐ-कश्ती नज़र
अब एक फरियाद मेरी
सुनले मालिक आखरी
दे मुझे तू हौसला बस
यही फरियाद है आखरी
तेरा साया साथ हो तो
वो मुकाम मिल जाएगा
जग में कर सके न जिसकी
कोई भी बराबरी
साथ हो कोई मेरे
अब न है इसकी कामना
मेरे मालिक तू ही अब
बस मेरा हाथ थामना
तेरे साये में रहूँ
जब तक भी देह में प्राण हैं
तेरी रहमतों से तो मालिक
पाषाण में भी प्राण हैं
है वचन तुझसे मेरा
हर कर्म करूँगा स्तय से
न भी हो कोई साथ मेरे
तब भी लड़ूंगा असत्य से
करूँगा अब हर कर्म को
मैं सच्चे निष्ठा भाव से
डिगेंगे न अब पग मेरे
सद्भाव से सद्मार्ग से।।
धन्यवाद
' तरुण त्यागी '